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दीवार में एक खिडकी रहती थी

इंग्रजी शीर्षक
Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi
सारांश

Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi (दीवार में एक खिडकी रहती थी) विनोद कुमार शुक्ल (जन्म : 1937) भारतीय हिंदी साहित्य के एक अत्यंत समादृत हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कविता और कथा में स्वयं को बरतते हुए एक ऐसी अभूतपूर्व भाषा संभव की जिसमें अचरज, सुख और सरोकार साथ-साथ चलते हैं-पठनीयता को बाधित किए बग़ैर । उनके नौ कविता-संग्रह, पाँच कहानी-संग्रह, छह उपन्यास प्रकाशित हैं। संसार की लगभग सभी बड़ी भाषाओं में उनकी रचनाएँ अनूदित हो चुकी हैं। वे रंगमंच और सिनेमा में उतरकर प्रशंसित-पुरस्कृत हो चुकी हैं। 'ज्ञानपीठ

पुस्तकाची माहिती

प्रकाशक
प्रकाशन वर्ष
2026
भाषा
मराठी
किंमत
299.00
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बंद